नवकार महामंत्र चैतन्य केन्द्रों पर
चैतन्य केन्द्रों पर भी नवकार मंत्र का जाप करते हैं। रक्षा कवच के रुप में संपूर्ण शरीर की रक्षा के लिए नवकार मंत्र का जाप नवपदध्यान अष्ट दल कमल में किया जाता है। नौ ग्रह हमारे शरीर में है, इसके साथ भी जाप करते हैं।
नवकार मंत्र का जाप – रंग और स्थान
णमो अरिहंताणं - स्थान मस्तक, रंग - श्वेत, केंद्र - ज्ञान केन्द्र
णमो सिद्धाणं - स्थान भृकुटि, रंग - लाल, केंद्र - दर्शन केन्द्र
णमो आयरियाणं - स्थान कण्ठ, रंग - पीला, केंद्र - विशुद्ध केन्द्र
णमो उवज्झायाणं - स्थान हृदय, रंग - हरा, केंद्र - आनन्द केन्द्र
णमो लोए सव्वसाहुणं - स्थान नाभि, रंग - नीला केंद्र - शक्ति केन्द्र
नमस्कार मंत्र के साथ रंगों का समायोजन है। हमारा शरीर भी पौदगलिक है। पुदगल के चार लक्षण है - वर्ण, गंध, रस और स्पर्श। वर्ण (रंग) से हमारे शरीर का बहुत निकट का संबंध है। जैसे नीला रंग कम होता है तो क्रोध अधिक आता है, लाल रंग की कमी होती है तो आलस्य, जड़ता पनपती है। इसी आधार पर हम नमस्कार महामंत्र की साधना कैसे कर रहे है, यह समझना जरूरी है। लेश्या ध्यान यही कहता है जैसा भाव वैसा रंग जैसा रंग बनेगा वैसा भाग्य बन जाता है।
"णमो अरिहन्ताणं" - ज्ञान केन्द्र पर श्वेत रंग का ध्यान करने से हमारी आंतरिक शक्तियों का जागरण होता है।
"णमो सिद्धाणं" - दर्शन केन्द्र पर लाल वर्ण का ध्यान करने से आंतरिक दृष्टि जागृत होती है।
"णमो आयरियाणं" - विशुद्धि केन्द्र पर पीले रंग का ध्यान करने से मन सक्रिय बनता है।
"णमो उवझायाणं" - आनन्द केन्द्र पर हरे रंग का ध्यान करने से विषापहार होता है, हरा रंग ठंडा होता है।
"णमो लोए सव्वसाहूणं" - शान्ति केन्द्र पर नीले रंग का ध्यान शांति प्रदान करता है। कषायों को शांत करता है।
बने अर्हम पुस्तक (लेखक अलका सांखला) से साभार