नवकार महामंत्र आराधना के विविध प्रकार

नवकार महामंत्र की आराधना अनेक रुपों में की जाती है। उसके पाँच पद और पैंतीस अक्षर है। इसकी आराधना बीजाक्षरों के साथ की जाती है, बिना बीजाक्षरों से केवल मंत्राक्षरों के साथ भी की जाती है।

नवकार महामंत्र आराधना के विविध प्रकार

post

नवकार महामंत्र (navkar mantra) आराधना के विविध प्रकार


नवकार महामंत्र की आराधना अनेक रुपों में की जाती है। उसके पाँच पद और पैंतीस अक्षर है। इसकी आराधना बीजाक्षरों के साथ की जाती है, बिना बीजाक्षरों से केवल मंत्राक्षरों के साथ भी की जाती है।

'ऐसो पंच णमोकारो' इस चुलिका के पद के साथ की जाती है और इस चुलिका पद के बिना भी की जाती है। नमस्कार महामंत्र का संक्षिप्त रुप ॐ में भी की जाती है, जिसमें पांचों पद सम्मिलित है।

नवकार महामंत्र की आराधना पाँच पदों के आदि अक्षर - अ, सि, आ, उ, सा से निघ्नन्न पंचाक्षरी मंत्र 'असिआउस' के रुप में भी की जाती है। यह पंचाक्षरी मंत्र बहुत प्रभावशाली है।

जैन परंपरा में 'ओम्' पंच परमेष्ठी के पांच वर्णों से निष्पन्न होता है। अरहन्त, अशरीर, आचार्य, उपाध्याय और मुनि - इन पांच परमेष्ठियों के आदि अक्षरों का योग करने पर 'ओम्' बनता है

अ+अ+आ+उ+म= ओम्।

पूरा नमस्कार महामंत्र ओंकार में गर्भित है। एक जैन व्यक्ति 'ओंकार' का जप करते समय प्राणशक्ति से लाभान्वित होता ही है और साथ-साथ पंच परमेष्ठी से अपनी तन्मयता का अनुभव करता है, अपने शरीर के कण-कण में परमेष्ठी पंचक की समस्याओं का अनुभव करता है।

जैन आचार्यों ने 'ओम्' की निष्पत्ति का एक दूसरा रुप भी प्रस्तुत किया है। अ - ज्ञान, उ - दर्शन और म - चारित्र का प्रतीक है। इन तीनों वर्गों से निष्पन्न (अ+उ+म) ओंकार त्रिरत्न का प्रतीक है। ओंकार की उपासना करने वाला मोक्ष मार्ग की उपासना करता है, ज्ञान, दर्शन और चारित्र - तीनों की उपासना करता है। यह भावनात्मक संबंध है। इस प्रकार 'ओम्' समूची वर्णमाला और भाविक अक्षरों में एक मूर्धन्य अक्षर बन गया। शब्द उच्चारण का एक बहुत बड़ा विज्ञान है। मंत्र शास्त्र ने उस पर बहुत प्रकाश डाला है। ओंकार' के उच्चारण से जमे हुए मल धुल जाते हैं।

इस महामंत्र की आराधना "अर्ह" के रुप में भी की जाती है। रंगों के साथ महामंत्र का जाप किया जाता है।

नमस्कार महामंत्र के आधार पर कितने मंगल मंत्र विकसित हुए हैं। नमस्कार महामंत्र से जुड़ा एक मंत्र है "अर्हम"। एक मंत्र है अ.सि.आ.उ.सा. । नमस्कार से बना एक मंत्र है 'ओम' । इस प्रकार नमस्कार मंत्र से जुड़े हुए पचासों मंत्र है, जो विघ्नों का निवारण करते हैं, ग्रहों के प्रभाव से बचते हैं।

बने अर्हम पुस्तक (लेखक अलका सांखला) से साभार

You might also like!