आदान भाण्डमात्र निक्षेपणा समिति-पाँच समिति
आदान भाण्डमात्र निक्षेपणा समिति
भण्डोपकरण लेने और रखने में प्रतिलेखन और प्रमार्जन की सम्यक (निर्दोष) प्रवृत्ति करने को आदान भाण्ड-मात्र निक्षेपणा समिति कहते हैं।
इसके चार भेद हैं 1. द्रव्य 2. क्षेत्र 3. काल 4. भाव।
1. द्रव्य से - उपधि देखकर व पूँजकर रखे तथा लेवे।
2. क्षेत्र से - सर्व क्षेत्र में।
3. काल से - जीवन पर्यन्त।
4. भाव से - उपयोग सहित। (राग-द्वेष रहित)
उपधि के दो भेद- 1. औघिक 2. औपग्रहिक।
1. औघिक - अर्थात सामान्य उपधि जो हमेशा पास रखी जावे, जैसे - रजोहरण, वसा, पात्र आदि गृहस्थ से लेवे एवं भोगे।
2. औपग्रहिक - प्रातिहारिक उपधि जो गृहस्थ से कारण से लेवे, भोगे एवं कार्य होने के बाद वापस लोटावे, जैसे - पाट, चौकी आदि