'प्रवचन माता' किसे कहा गया है?

पाँच समिति और तीन गुप्ति इन दोनों का सम्मिलित नाम 'प्रवचन माता' है। ये प्रवचन माताएँ चारित्र रूपा हैं। भगवान जगत् पितामह के रूप में है।

'प्रवचन माता' किसे कहा गया है?

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आचार के जो पाँच भेद हैं. वे इस प्रकार है-(1) ज्ञानाचार (2) दर्शनाचार (3) चरित्राचार (4) तपाचार और (5) वीर्याचार। 

इन पाँच भेदों में भी चारित्र के विषय में स्पष्टत: वर्णन है। आचार के ये जो पाँच भेद हैं। उनमें प्रथम दो का ज्ञान में तथा अन्तिम तीन का चारित्र में समाहार किया जा सकता है। क्योंकि तप और वीर्य ये दोनों चारित्र के अभिन्न अंग हैं। चारित्राचार का अर्थ है - समिति-गुप्ति रूप आचरण। समिति का अर्थ है सम्यक् रूप से प्रवर्तन। जो प्रवृत्ति अहिंसा से सम्बधित है, वह समिति है और गुप्ति का अर्थ है-निवर्तन। समिति-गुप्ति के आठ प्रकार हैं। पाँच समितियाँ और तीन गुप्तियों का प्रणिधान, जो समस्त चारित्र के उत्पादन, संरक्षण और विशोधन में अनन्य साधन रूप है। पाँच समिति और तीन गुप्ति इन दोनों का सम्मिलित नाम 'प्रवचन माता' है। ये प्रवचन माताएँ चारित्र रूपा हैं। भगवान जगत् पितामह के रूप में है। आत्मा के अनन्त आध्यात्मिक सद्गुणों को विकसित करने वाली यह प्रवचन माता है। सम्यग्दर्शन और सम्यग्ज्ञान को प्रवचन कहा जाता है, इन दोनों की सुरक्षा और विशुद्धता के लिये पाँच समितियाँ और तीन गुप्तियाँ ये माता के समान हैं।

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